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शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,
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शिव पुराण के बयालीसवें अध्याय में भगवान शिव की दिव्य बारात का हिमालय नगरी में भव्य स्वागत और अभिनंदन वर्णित है। गिरिराज हिमालय स्वयं भगवान शिव और समस्त देवताओं का स्वागत करते हैं। देवताओं, ऋषि-मुनियों तथा बारातियों के सम्मान, भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, विष्णु और ब्रह्मा की उपस्थिति तथा पार्वती विवाह की तैयारियों का अत्यंत सुंदर वर्णन इस अध्याय में मिलता है। यदि आप सम्पूर्ण शिव पुराण का श्रवण क्रमबद्ध रूप से करना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला से अवश्य जुड़ें। 🙏 हर हर महादेव!
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शिव पुराण के अध्याय 41 में विश्वकर्मा द्वारा निर्मित दिव्य विवाह मंडप का अद्भुत वर्णन मिलता है। नारद जी भगवान शिव को हिमालयपुरी के भव्य मंडप की जानकारी देते हैं, जहाँ देवताओं, ऋषियों और अनेक जीवों की इतनी जीवंत प्रतिमाएँ बनाई गई थीं कि सभी आश्चर्यचकित रह गए। इस अध्याय में देवताओं के मन में उत्पन्न भय, भगवान शिव का उन्हें दिया गया आश्वासन तथा शिव बारात के हिमालयपुरी पहुँचने का दिव्य प्रसंग वर्णित है। यदि आप शिव पुराण सम्पूर्ण , शिव-पार्वती विवाह कथा , महादेव की दिव्य लीलाएँ , और सनातन धर्म की पौराणिक कथाएँ सुनना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला से अवश्य जुड़ें। 🙏 हर हर महादेव 🙏
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भगवान शिव की बारात का हिमालयपुरी की ओर प्रस्थान, शिव पुराण के अध्याय 40 में भगवान शिव की दिव्य बारात के हिमालयपुरी की ओर प्रस्थान का अद्भुत वर्णन किया गया है। इस अध्याय में नंदी, वीरभद्र, भैरव, शिवगण, भगवान विष्णु, ब्रह्माजी, इंद्र, ऋषि-मुनि, गंधर्व, किन्नर तथा समस्त देवताओं के साथ भगवान शिव की अलौकिक बारात का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया है। यदि आप शिव पुराण का सम्पूर्ण पाठ , भगवान शिव की कथाएँ , शिव-पार्वती विवाह , तथा सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों का अध्ययन करना चाहते हैं, तो यह श्रृंखला आपके लिए है। 🙏 हर हर महादेव 🙏
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शिव पुराण के अध्याय 39 में भगवान शिव द्वारा अपने दिव्य विवाह के लिए समस्त देवताओं, ऋषियों, सिद्धों और लोकपालों को निमंत्रण देने का पावन प्रसंग वर्णित है। नारदजी भगवान शिव का संदेश लेकर सभी देवताओं को आमंत्रित करते हैं। कैलाश पर्वत पर देवताओं का आगमन, शिवजी का दिव्य श्रृंगार और शिव-पार्वती विवाह की भव्य तैयारियाँ इस अध्याय की मुख्य विशेषताएँ हैं। यदि आप शिव महापुराण की संपूर्ण कथा सुन रहे हैं, तो यह अध्याय अवश्य देखें और भगवान शिव की इस दिव्य लीला का आनंद लें। 🔱 अध्याय 39 – शिवजी का देवताओं को निमंत्रण 🔱 शिव-पार्वती विवाह की भव्य तैयारी 🔱 कैलाश पर देवताओं का आगमन 🔱 शिव महापुराण हिंदी कथा 🙏 हर हर महादेव 🙏
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शिव पुराण के अध्याय 38 में विश्वकर्मा द्वारा भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के लिए बनाए गए अद्भुत मंडप का विस्तृत वर्णन मिलता है। शैलराज हिमालय के आदेश पर देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा ने ऐसा अलौकिक मंडप तैयार किया जिसे देखकर देवता, ऋषि और स्वयं भगवान शिव भी आश्चर्यचकित हो गए। इस अध्याय में दिव्य मंडप, देवताओं के लोकों, सुंदर मूर्तियों, स्वर्गीय सजावट और शिव विवाह की भव्य तैयारियों का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया है। 🔱 अध्याय 38 – विश्वकर्मा द्वारा दिव्य मंडप की रचना 🔱 शिव-पार्वती विवाह की भव्य तैयारी 🔱 शिव महापुराण हिंदी कथा 🔱 सनातन धर्म की प्रेरणादायक कथा 🙏 हर हर महादेव 🙏
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शिव पुराण के अध्याय 37 में वर्णन मिलता है कि कैसे शैलराज हिमालय ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह हेतु लग्न पत्रिका तैयार करवाई और उसे कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के पास भेजा। इस अध्याय में विवाह की तैयारियों, शुभ मुहूर्त, देवताओं के आमंत्रण और शिव-पार्वती विवाह के पवित्र प्रसंग का सुंदर वर्णन किया गया है। यदि आप शिव पुराण की सम्पूर्ण कथा सुनना चाहते हैं, तो इस अध्याय को अंत तक अवश्य सुनें। 🔱 अध्याय 37 – हिमालय का लग्न पत्रिका भेजना 🔱 भगवान शिव एवं माता पार्वती विवाह कथा 🔱 शिव महापुराण हिंदी कथा 🔱 सनातन धर्म एवं पुराण कथाएं 🙏 हर हर महादेव 🙏
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शिव पुराण के अध्याय 36 में सप्तऋषि कैलाश पर्वत पहुँचकर भगवान शिव को हिमालय और मैना की स्वीकृति का समाचार देते हैं। वे भगवान शिव से वैदिक रीति से देवी पार्वती का पाणिग्रहण संस्कार करने का अनुरोध करते हैं। इस अध्याय में शिव-पार्वती विवाह की तैयारियों का शुभारंभ होता है और सभी देवताओं, ऋषियों तथा दिव्य शक्तियों को विवाह में आमंत्रित करने की चर्चा होती है। ✔ सप्तऋषियों का कैलाश आगमन ✔ भगवान शिव को विवाह का संदेश ✔ पार्वती के वाग्दान की सूचना ✔ शिवजी की विनम्रता और विवाह पर चर्चा ✔ देवताओं और ऋषियों को विवाह हेतु आमंत्रण यदि आपको शिव पुराण की दिव्य कथाएं पसंद आती हैं तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें। ॐ नमः शिवाय #ShivPuran #ShivPuranHindi #Adhyay36 #ShivParvatiVivah #Mahadev #Kailash #Saptarishi #ShivKatha #SanatanDharma #LordShiva इस अध्याय में जानिए:
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शिव पुराण के अध्याय 35 में सप्तऋषियों और देवी अरुंधती द्वारा हिमालय और मैना को समझाने के बाद शिव-पार्वती विवाह का निर्णय लिया जाता है। हिमालय भगवान शिव की महिमा को स्वीकार करते हुए अपनी पुत्री पार्वती को शिवजी की अमानत घोषित करते हैं। सप्तऋषि पार्वती को आशीर्वाद देते हैं और विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं। इस अध्याय में जानिए: ✔ भगवान शिव की सर्वोच्च महिमा ✔ हिमालय द्वारा विवाह की स्वीकृति ✔ पार्वती को सप्तऋषियों का आशीर्वाद ✔ शिव-पार्वती विवाह की तैयारी ✔ शुभ विवाह मुहूर्त का निर्धारण यदि आपको शिव पुराण की कथाएं पसंद आती हैं तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें। #ShivPuran #ShivPuranHindi #Adhyay35 #ShivParvatiVivah #LordShiva #Parvati #ShivKatha #HindiPauranikKatha #Mahadev #SanatanDharma
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शिव पुराण के चौंतीसवें अध्याय में देवी पद्मा और ऋषि पिप्पलाद की प्रेरणादायक कथा मिलती है। इस अध्याय में देवी पद्मा के पतिव्रत धर्म, धर्मराज द्वारा ली गई परीक्षा, शाप और वरदान का वर्णन है। इस कथा में बताया गया है कि कैसे देवी पद्मा ने अपने वृद्ध पति पिप्पलाद के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई और धर्मराज से वरदान प्राप्त किया।
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शिव पुराण के तैंतीसवें अध्याय में जानिए राजा अनरण्य, उनकी पुत्री पद्मा और ऋषि पिप्पलाद की अद्भुत कथा। इस अध्याय में धर्म, त्याग, कुल रक्षा और भाग्य की गहरी शिक्षा मिलती है। सुनिए शिव पुराण अध्याय 33 हिंदी में और जानिए कैसे राजा अनरण्य ने अपने कुल की रक्षा के लिए कठिन निर्णय लिया। ✨ इस वीडियो में: राजा अनरण्य की कथा देवी पद्मा का विवाह ऋषि पिप्पलाद की कहानी धर्म और त्याग का महत्व शिव पुराण हिंदी कथा अगर आपको शिव पुराण की कथाएं पसंद हैं तो वीडियो को Like, Share और Channel Subscribe जरूर करें। #ShivPuran #ShivMahapuran #Adhyay33 #ShivPuranHindi #PippaladRishi #PadmaKatha #Mahadev #ShivKatha #HindiKahani #Bhakti
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शिव पुराण के बत्तीसवें अध्याय में महर्षि वशिष्ठ हिमालय को भगवान शिव के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराते हैं। इस अध्याय में शिव-पार्वती विवाह का महत्व, भगवान शिव की महिमा और देवी पार्वती के दिव्य स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है। महर्षि वशिष्ठ बताते हैं कि भगवान शिव स्वयं सृष्टि के पालनकर्ता और परमेश्वर हैं तथा देवी पार्वती आदिशक्ति हैं। यह अध्याय शिवभक्तों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक है।
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शिव पुराण के इकतीसवें अध्याय में सप्तऋषियों का हिमालय के घर आगमन और देवी मैना को समझाने की कथा वर्णित है। इस अध्याय में सप्तऋषि हिमालय और मैना को भगवान शिव की महिमा बताते हैं और समझाते हैं कि पार्वती का विवाह शिवजी से ही होना चाहिए। इस कथा में तारकासुर के अत्याचार, शिव-पुत्र की आवश्यकता, पार्वती की तपस्या और शिव-पार्वती विवाह के दिव्य कारण का वर्णन मिलता है। shiv puran adhyay 31, shiv puran chapter 31 hindi, सप्तऋषियों का आगमन, हिमालय को समझाना, शिव पार्वती विवाह, parvati vivah katha, shiv puran hindi, shiv katha hindi, mahadev katha, saptarishi shiv puran, hindu mythology hindi, sanatan dharm katha #ShivPuran #Adhyay31 #Saptarishi #ShivParvati #Mahadev #ParvatiVivah #ShivKatha #SanatanDharma
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शिव पुराण के तीसवें अध्याय में भगवान शिव ब्राह्मण वेष धारण करके शैलराज हिमालय के घर जाते हैं। वहाँ वे हिमालय को पार्वती और शिव विवाह के विषय में परखते हैं और शिवजी के गुण-दोषों की चर्चा करते हुए हिमालय की परीक्षा लेते हैं। इस अध्याय में भगवान शिव की लीला, हिमालय की भक्ति, पार्वती की पहचान और शिव-पार्वती विवाह से पहले की दिव्य परीक्षा का वर्णन मिलता है।
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शिव पुराण के उनतीसवें अध्याय में भगवान शिव द्वारा हिमालय से माता पार्वती का हाथ मांगने की अद्भुत कथा वर्णित है। इस अध्याय में शिवजी की लीला, उनकी माया और पार्वती जी के प्रति उनके दिव्य प्रेम का सुंदर वर्णन मिलता है। इस कथा में बताया गया है कि कैसे भगवान शिव नट रूप धारण करके हिमालय और मैना की परीक्षा लेते हैं, और अंत में उनके मन में पश्चाताप उत्पन्न होता है। यह अध्याय भक्ति, श्रद्धा और भगवान की लीला को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। 🙏 यदि आप शिव पुराण की सम्पूर्ण कथा सुनना चाहते हैं, तो इस वीडियो को अंत तक देखें।
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शिव पुराण के अट्ठाईसवें अध्याय में भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण संवाद का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में पार्वती जी अपने पूर्व जन्म, तपस्या और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा को स्पष्ट करती हैं। भगवान शिव इस संवाद में सृष्टि के गहरे रहस्य, प्रकृति और पुरुष के संबंध, तथा माया और ब्रह्म के तत्व को समझाते हैं। अंततः वे पार्वती जी की इच्छा स्वीकार करते हैं और विवाह के लिए सहमति प्रदान करते हैं। ✨ इस अध्याय की मुख्य बातें: पार्वती जी की अटूट भक्ति और प्रेम शिव का आध्यात्मिक ज्ञान और उपदेश प्रकृति और परमात्मा का संबंध शिव-पार्वती विवाह का निर्णय 📖 इस वीडियो में आपको मिलेगा: ✔️ पूरा अध्याय सरल हिंदी में ✔️ गहन आध्यात्मिक अर्थ ✔️ जीवन से जुड़ी सीख 🙏 वीडियो पसंद आए तो LIKE, SHARE और SUBSCRIBE जरूर करें।
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शिव पुराण के सत्ताईसवें अध्याय में देवी पार्वती के अद्भुत धैर्य, भक्ति और भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में पार्वती जी एक ब्राह्मण के रूप में आए भगवान शिव की परीक्षा के दौरान उनके अपमान को सहन नहीं करतीं और क्रोध में उन्हें फटकारती हैं। इसी क्षण भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट होते हैं और पार्वती जी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी स्वीकार करने का वचन देते हैं। यह अध्याय हमें सिखाता है: सच्ची भक्ति क्या होती है भगवान की परीक्षा और भक्त की दृढ़ता शिव-पार्वती मिलन का दिव्य रहस्य 📖 इस वीडियो में आपको मिलेगा: ✔️ पूरा अध्याय सरल हिंदी में ✔️ गहरा आध्यात्मिक अर्थ ✔️ भक्ति और धैर्य का संदेश 🙏 वीडियो पसंद आए तो LIKE, SHARE और SUBSCRIBE जरूर करें।
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शिव पुराण के छब्बीसवें अध्याय में भगवान शिव, ब्राह्मण के वेश में माता पार्वती की परीक्षा लेते हैं। वे पार्वती को समझाने का प्रयास करते हैं कि शिवजी उनके योग्य पति नहीं हैं और उन्हें शिव से दूर रहना चाहिए। इस अध्याय में शिवजी अपने ही स्वरूप की निंदा करते हुए पार्वती की भक्ति और दृढ़ता को परखते हैं। पार्वती देवी इन सब बातों को सुनकर भी अपने संकल्प से विचलित नहीं होतीं।
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शिव पुराण के पच्चीसवें अध्याय में भगवान शिव स्वयं ब्राह्मण रूप धारण कर देवी पार्वती की कठोर तपस्या की परीक्षा लेने आते हैं। पार्वती जी अपने पूर्व जन्म (सती) का स्मरण करती हैं और बताती हैं कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में प्राप्त करना चाहती हैं। तीन हजार वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भी जब शिवजी प्रकट नहीं होते, तो पार्वती अग्नि में प्रवेश करने का निश्चय करती हैं। किंतु उनकी तपस्या की शक्ति से अग्नि भी ठंडी हो जाती है। तब शिवजी उनकी निष्ठा और दृढ़ संकल्प की परीक्षा लेते हैं। यह अध्याय भक्ति, धैर्य, तपस्या और अटूट प्रेम का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। 📌 इस वीडियो में जानिए: शिवजी ने ब्राह्मण रूप क्यों धारण किया? पार्वती ने अग्नि में प्रवेश क्यों किया? तपस्या की सच्ची परीक्षा क्या होती है? शिव-पार्वती मिलन का आध्यात्मिक महत्व 🙏 यदि आपको शिव पुराण की यह कथा पसंद आए तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।
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शिव पुराण के चौबीसवें अध्याय में सप्तऋषि देवी पार्वती की तपस्या की परीक्षा लेते हैं। वे नारद मुनि की निंदा करते हुए पार्वती को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। लेकिन देवी पार्वती अटल विश्वास के साथ कहती हैं कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में स्वीकार करेंगी। यह अध्याय गुरु भक्ति, दृढ़ निश्चय और अटूट श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण है। 📌 इस वीडियो में जानिए: सप्तऋषि क्यों आए? नारद की निंदा क्यों की गई? पार्वती की निष्ठा कैसी थी?
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शिव पुराण के तेईसवें अध्याय में देवता भगवान शिव से पार्वती जी से विवाह करने का निवेदन करते हैं। भगवान शिव विवाह को एक बंधन बताते हैं और समझाते हैं कि कैसे काम, क्रोध और मोह तपस्या में बाधा डालते हैं। फिर भी भक्तों की रक्षा के लिए वे पार्वती से विवाह करने का निर्णय लेते हैं। 📌 इस वीडियो में जानिए: शिव विवाह को बंधन क्यों कहते हैं? शिव का वैराग्य भाव क्या है? भक्तों के लिए शिव क्या त्याग करते हैं?